Best 2 Line Shayari | Short Two Line Shayari Collection

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दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं! हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ! कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब! मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं!

Hamein kya pata tha mausam aise ro padega, Humne to aasman ko bus apni dastan hi sunaai thi..

Tum door sahi majboor sahi, par yaad tumhari aati hai, tum naam wahan par leti ho, awaz yahan par aati hai….

करनी है खुदा से गुजारिश,

तेरी दोस्ती के सिवा कोई बंदगी न मिले,

हर जनम में मिले दोस्त तेरे जैसा,

या फिर कभी जिंदगी न मिले।

काश यह जालिम जुदाई न होती! ऐ खुदा तूने यह चीज़ बनायीं न होती! न हम उनसे मिलते न प्यार होता! ज़िन्दगी जो अपनी थी वो परायी न होती!

वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते! खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते! मर गए पर खुली रखी आँखें! इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते!

ताल्लुकात बढ़ाने हैं तो कुछ आदतें बुरी भी सीख ले गालिब…

ऐब न हों…

तो लोग महफ़िलों में भी नहीं बुलाते.

कैसे कह दूँ, मेरा प्यार वेस्ट हो गया…
जब जब अपना दर्द लिखा.. कॉपी-पेस्ट हो गया.

तेरी एक झलक पाने को तरस जाता है दिल मेरा…💞
खुश किस्मत हैं वो लोग जो तेरे घर के सामने रहते है..! 💞

जो कहते थे ‘मर जायेंगे तुम बिन’ वो आज भी ज़िंदा हैं ,
ये बात किसी और को कहने के लिए…!

कुछ लोग कहते है की बदल गया हूँ मैं,
उनको ये नहीं पता की संभल गया हूँ मैं,
उदासी आज भी मेरे चेहरे से झलकती है,
पर
अब दर्द में भी मुस्कुराना सीख गया हूँ मैं|

कभी रो के मुस्कुराए, कभी मुस्कुरा के रोए,
जब भी तेरी याद आई तुझे भुला के रोए,
एक तेरा ही तो नाम था जिसे हज़ार बार लिखा,
जितना लिख के खुश हुए उस से ज़यादा मिटा के रोए.

बहुत हो चुका इंतेज़ार उनका, अब और ज़ख़्म सहे जाते नही, क्या बयान करें उनके सितम को, दर्द उनके कहे जाते नही

बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है,
आप खुश रहें, मेरा क्या है..
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।

रूठना तुम्हारा हक है
पर वजह बता देना
खफा होना गलत नहीं
पर खता बता देना

कौन कहता है कि …मुसाफिर ज़ख़्मी नहीं होते ….
रास्ते गवाह हैं …..बस कमबख्त गवाही नहीं देते !

बात इतनी सी थी ,कि तुम अच्छे लगते थे. अब बात इतनी बढ़ गई,कि तुम बिन कुछ अच्छा नहीं लगता.

ज्यादा फर्क नही रखा खुदा ने हम दोनों के बीच…
तुझे चाहने वाले बहुत है तो मुझे ठुकराने वाले बहुत…!!

दुआ मांगी थी आशियाने की,
चल पड़ी आंधियां ज़माने की…
मेरे गम को कोई समझ न पाया,
मुझे आदत थी मुस्कराने की…

झे उंचाईयों पे देखकर हैरान हैं सब ,,, मगर किसी ने मेरे पांव के छाले नहीं देखें ।।।

मेरे अहसास में शामिल हैं तु राहत की तरह

तू बता कैसे बदल दूँ तुझे आदत की तरह